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Nov 03, 2026
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छठ पूजा 2026 कब है? 13 से 16 नवंबर तक नहाय-खाय, खरना, संध्या और उषा अर्घ्य की तारीख, पटना में अर्घ्य का समय, कथा, सामग्री लिस्ट और व्रत नियम जानें।

छठ पूजा भारत के सबसे पवित्र और प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह चार दिनों का महापर्व है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की उपासना की जाती है। "छठ" शब्द का अर्थ है "छठा", क्योंकि इस पर्व की मुख्य पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होती है।
यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। आज दिल्ली, मुंबई से लेकर दुबई और अमेरिका तक, जहाँ भी पूर्वांचल के लोग रहते हैं, वहाँ छठ पूजा की विशेष धूम देखने को मिलती है।
इस पर्व की सबसे खास बात इसकी सादगी और पवित्रता है। इसमें न मूर्ति पूजा होती है और न ही किसी विशेष पुरोहित की आवश्यकता होती है। व्रती पानी में खड़े होकर सीधे डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। अमीर-गरीब सभी एक ही घाट पर समान श्रद्धा और भावना के साथ पूजा करते हैं।
| दिन | अनुष्ठान | तारीख (2026) |
|---|---|---|
| पहला दिन | नहाय-खाय | शुक्रवार, 13 नवंबर |
| दूसरा दिन | खरना (लोहंडा) | शनिवार, 14 नवंबर |
| तीसरा दिन | संध्या अर्घ्य | रविवार, 15 नवंबर |
| चौथा दिन | उषा अर्घ्य और पारण | सोमवार, 16 नवंबर |
छठ पूजा में सूर्य देव को संध्या और प्रातःकाल अर्घ्य दिया जाता है। नीचे प्रमुख शहरों के अनुसार सूर्यास्त और सूर्योदय का अनुमानित समय दिया गया है।
| शहर | संध्या अर्घ्य – 15 नवंबर | उषा अर्घ्य – 16 नवंबर |
|---|---|---|
| पटना | शाम 5:01 बजे | सुबह 6:07 बजे |
| गया | शाम 5:03 बजे | सुबह 6:07 बजे |
| मुजफ्फरपुर | शाम 4:59 बजे | सुबह 6:07 बजे |
| भागलपुर | शाम 4:54 बजे | सुबह 6:00 बजे |
| रांची | शाम 5:04 बजे | सुबह 6:03 बजे |
| वाराणसी | शाम 5:10 बजे | सुबह 6:16 बजे |
| दिल्ली | शाम 5:28 बजे | सुबह 6:44 बजे |
| कोलकाता | शाम 4:53 बजे | सुबह 5:50 बजे |
| मुंबई | शाम 6:00 बजे | सुबह 6:46 बजे |
नोट: ये समय द्रिक पंचांग के अनुसार हैं। स्थानीय परिस्थितियों और घाट की व्यवस्था के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे घाट पर 30–60 मिनट पहले पहुँचें।

छठ पूजा का पहला दिन नहाय-खाय कहलाता है। इस दिन व्रती नदी या तालाब में स्नान करते हैं और घर तथा रसोई की अच्छी तरह सफाई की जाती है।
इस दिन व्रती केवल एक बार सात्विक भोजन करते हैं। भोजन में मुख्य रूप से कद्दू (लौकी), चने की दाल और चावल शामिल होते हैं। भोजन बिना लहसुन-प्याज और सेंधा नमक के बनाया जाता है।
छठ पूजा का दूसरा दिन खरना या लोहंडा कहलाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।
इस दिन मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर (रसियाव) और रोटी बनाई जाती है। सूर्य देव को भोग लगाने के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है, जिसमें अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है।
तीसरे दिन छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान संध्या अर्घ्य होता है। इस दिन घरों में ठेकुआ बनाया जाता है और बाँस के सूप तथा दउरा में फल, गन्ना और अन्य पूजा सामग्री सजाई जाती है।
शाम को परिवार के सभी सदस्य छठ गीत गाते हुए घाट पर पहुँचते हैं। व्रती पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
कई परिवारों में इस रात कोसी भरने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसमें गन्ने के मंडप के नीचे दीप जलाए जाते हैं।
छठ पूजा के चौथे और अंतिम दिन सुबह सूर्योदय से पहले श्रद्धालु दोबारा घाट पर पहुँचते हैं। व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतान की लंबी उम्र की कामना करते हैं।
पूजा पूरी होने के बाद व्रती प्रसाद और जल ग्रहण करके अपना 36 घंटे का निर्जला व्रत समाप्त करते हैं। इसे पारण कहा जाता है।
छठ पूजा से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। इनमें प्रमुख हैं:
महाभारत के अनुसार, कर्ण सूर्य देव के पुत्र थे। मान्यता है कि वे प्रतिदिन कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते थे। इसी कारण सूर्य उपासना और जल में खड़े होकर अर्घ्य देने की परंपरा को उनसे जोड़ा जाता है।
मान्यता है कि वनवास के दौरान द्रौपदी ने छठ व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से पांडवों को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने और अपना खोया हुआ राजपाट वापस पाने में सहायता मिली।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अयोध्या लौटने के बाद माता सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव की उपासना की थी।
छठी मैया को षष्ठी देवी का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे बच्चों की रक्षा करती हैं और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। राजा प्रियव्रत की कथा में षष्ठी देवी द्वारा उनके मृत पुत्र को जीवनदान देने का उल्लेख मिलता है।

छठ पूजा केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व भी है। इसमें जीवन देने वाले सूर्य, पोषण देने वाले जल और नई फसल के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है।
छठ पूजा के कुछ प्रमुख महत्व इस प्रकार हैं:
- सूर्य उपासना: सूर्य देव को ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन का स्रोत माना जाता है।
- परिवार की सुख-समृद्धि: छठी मैया से संतान की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है।
- प्रकृति के प्रति सम्मान: जल, सूर्य, फल और अनाज के महत्व को समझाया जाता है।
- अनुशासन और शुद्धता: चार दिनों तक कठिन नियमों का पालन किया जाता है।
- सामाजिक एकता: सभी वर्गों के लोग मिलकर घाटों की सफाई करते हैं और प्रसाद बाँटते हैं।
छठ पूजा स्थानीय व्यापार और छोटे व्यवसायों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दौरान फल, बाँस के उत्पाद, पूजा सामग्री, मिठाइयों और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। CAIT के अनुसार, छठ पूजा 2025 के दौरान देशभर में ₹50,000 करोड़ से अधिक का कारोबार होने का अनुमान बताया गया था, जिसमें बिहार का योगदान लगभग ₹15,000 करोड़ था।
छठ पूजा की तैयारी के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:
बाँस का सूप और दउरा
ठेकुआ और कसार
पत्तों सहित गन्ना
केला, नारियल और बड़ा नींबू (डाभ)
सिंघाड़ा, शकरकंद और मूली
कच्ची हल्दी और अदरक के पौधे
दीया, घी और रुई की बत्ती
लोटा या कलश
सिंदूर, अक्षत और फूल
पान, सुपारी और अगरबत्ती
नए या साफ धुले हुए कपड़े
छठ पूजा में शुद्धता और अनुशासन का विशेष महत्व है। इस दौरान कुछ प्रमुख नियमों का पालन किया जाता है:
चारों दिन घर में लहसुन, प्याज, मांस और अंडे का सेवन नहीं किया जाता।
प्रसाद पूरी शुद्धता के साथ बनाया जाता है। कई परिवारों में इसके लिए नए मिट्टी के चूल्हे का उपयोग किया जाता है।
प्रसाद बनाते समय व्रती उसे चखते नहीं हैं।
कई व्रती व्रत के दौरान जमीन पर सोते हैं।
व्रत के दौरान स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
स्वास्थ्य संबंधी सलाह: गर्भवती महिलाओं, डायबिटीज के मरीजों, बुजुर्गों और नियमित दवा लेने वाले लोगों को निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
छठ पूजा में ठेकुआ सबसे प्रमुख और पारंपरिक प्रसाद माना जाता है। इसकी खुशबू और स्वाद हर बिहारी परिवार के लिए इस महापर्व की खास पहचान है।
ठेकुआ की शुद्धता अच्छी गुणवत्ता वाले आटे से शुरू होती है। आजकल कई परिवार ताजा और शुद्ध आटा तैयार करने के लिए घर पर ही गेहूँ पीसना पसंद करते हैं।
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छठ पूजा 2026 शुक्रवार, 13 नवंबर से सोमवार, 16 नवंबर तक मनाई जाएगी। नहाय-खाय 13 नवंबर, खरना 14 नवंबर, संध्या अर्घ्य 15 नवंबर और उषा अर्घ्य 16 नवंबर को होगा।
पटना में 15 नवंबर 2026 को संध्या अर्घ्य का समय शाम 5:01 बजे और 16 नवंबर को उषा अर्घ्य का समय सुबह 6:07 बजे है।
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, संतान की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
छठ पूजा का सबसे प्रमुख प्रसाद ठेकुआ है, जिसे गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बनाया जाता है। इसके अलावा कसार, गन्ना, केला, नारियल और मौसमी फल भी प्रसाद में शामिल होते हैं।
छठ पूजा 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ!
छठी मैया आप सभी के परिवार में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनाए रखें।
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